प्री-प्राइमरी शिक्षा को सुदृढ़ करने का सरकार का बड़ा अभियान
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के प्री-प्राइमरी स्कूलों में एजुकेटर से जुड़ी नई अधिसूचना जारी की गई है। बेसिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश की ओर से मिली जानकारी के अनुसार राज्य के सभी जिलों में आंगनवाड़ी ECCE एजुकेटर तैनात किए जाएंगे। जो भी अभ्यर्थी आंगनवाड़ी बाल वाटिका स्कूलों में एजुकेटर बनने की इच्छा रखते हैं, उनके लिए यह अहम खबर है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों को पढ़ाने के उद्देश्य से एजुकेटर नियुक्त करने का निर्णय लिया है। यह नियुक्ति सभी जिलों में की जाएगी। शुरुआती चरण में 212 एजुकेटर रखे जाएंगे। बताया गया है कि को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों पर इनकी तैनाती होगी। इसके लिए मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से होम साइंस में स्नातक करने वाले अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। साथ ही नर्सरी अध्यापक प्रशिक्षण (NTT) या सीट नर्सरी डिप्लोमा धारक उम्मीदवार भी शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद से मान्य योग्यता रखने वाले भी पात्र होंगे।
एजुकेटर बनने के लिए केवल डिग्री ही नहीं बल्कि कुछ शर्तें भी पूरी करनी होंगी। इसमें न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष तय की गई है। आवेदन केवल उत्तर प्रदेश के स्थायी निवासी ही कर पाएंगे। जारी अधिसूचना के मुताबिक किसी प्रकार का अनुभव अनिवार्य नहीं होगा। यह नियम पूरे प्रदेश के सभी जिलों पर लागू होंगे।
जो भी युवा एजुकेटर बनना चाहते हैं, उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार के सेवायोजन पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा। पंजीकरण के बाद आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे। प्रक्रिया पूरी कर लेने के बाद प्री-प्राइमरी स्कूलों में एजुकेटर के लिए आवेदन किया जा सकेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार का इरादा है कि प्री-प्राइमरी शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए 1,12,000 से अधिक एजुकेटर तैनात किए जाएँ। यह अभियान चरणबद्ध तरीके से चलेगा। पहले चरण में 10,000 और दूसरे चरण में 8,000 से अधिक एजुकेटर रखे जा रहे हैं। लक्ष्य है कि वर्ष 2026 तक सभी संविदा एजुकेटर की नियुक्ति पूरी कर ली जाए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को प्री-प्राइमरी शिक्षा दी जानी है, जिसके लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएँ और ECCE एजुकेटर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।





