राजधानी देहरादून में पिछले कुछ दिनों से एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने सामाजिक सौहार्द को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा शहर में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों को कब्रिस्तान में शव दफनाने से रोका जा रहा है। इस घटना के बाद शहरी क्षेत्र में रहने वाले मुस्लिम समुदाय में भारी आक्रोश व्याप्त है।
देहरादून में कब्रिस्तान विवाद
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटनाएं केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला नहीं हैं, बल्कि समाज को बांटने की कोशिश भी हो सकती है। चर्चा यह भी है कि कुछ लोग वक्फ संपत्तियों पर कब्जे के उद्देश्य से इस तरह के विवाद खड़े कर रहे हैं, जिससे जमीनों पर अतिक्रमण को बढ़ावा मिल सके। हालांकि, इस तरह के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
समाज के विभिन्न वर्गों में आक्रोश
समाज के विभिन्न वर्गों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि किसी भी धर्म में यह स्वीकार्य नहीं हो सकता कि मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार या दफन के लिए परिजनों को भटकना पड़े। इसे इंसानियत के खिलाफ बताया जा रहा है और सभी समुदायों में इसे लेकर नाराजगी देखी जा रही है।
कैबिनेट मंत्री से की मुलाका
इसी मुद्दे को लेकर देहरादून के सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री खजान दास से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें पूरे मामले से अवगत कराया और एक ज्ञापन सौंपते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
DM को दिए रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश
मंत्री खजान दास ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया है कि जल्द ही इस पर उच्चस्तरीय बैठक बुलाई जाएगी। साथ ही, उन्होंने जिला प्रशासन को पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।





