प्रधानाचार्य पदों पर बाहर से सीधी भर्ती को लेकर चढ़ा पारा
श्रीनगर गढ़वाल। विधानसभा चुनाव-2027 के लिए अभी से विसात बिछने लगी है। छात्र, बेरोजगार, आम आदमी और शिक्षकों के सड़कों पर आने से राज्य सरकार स्वयं को असहज महसूस कर रही है। स्कूलों में प्रधानाचार्य पदों पर बाहर से सीधी भर्ती ने पूरे राज्य में शिक्षक वर्ग में आग सुलगा दी है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सरकार ने राजकीय शिक्षक संघ से वार्ता के तुरंत बाद प्रधानाचार्य पदों पर शासन की तरफ से सीधी भर्ती की विज्ञप्ति जारी कर दी थी। जिसके बाद शिक्षकों का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया और शिक्षक संघ ने परीक्षा के बहिष्कार सहित आंदोलन का ऐलान कर दिया। इसी तहत आक्रोशित राजकीय शिक्षक संघ से जुड़े हजारों शिक्षकों ने आज श्रीनगर की सड़कों पर उतर कर सरकार के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन किया है।
शिक्षक संघ के इस निर्णय ने शिक्षा विभाग की परेशानी भी बढ़ा दी। आननफानन में परीक्षा को सकुशल संपन्न कराने के लिए एलटी और अशासकीय विद्यालयों के शिक्षकों को मैदान में उतारने के साथ-साथ प्राथमिक और जूनियर के अध्यापकों को प्रतीक्षा में रखा गया है। राजकीय शिक्षक संघ के विरोध प्रदर्शन के बीच राज्य की धामी सरकार सरकार शिक्षकों की मांगों के समाधान तलाशने की लगातार बात कह रही है। सरकार का कहना है कि हाई स्कूलों की तुलना में इंटरमीडिएट कॉलेजों की संख्या अधिक होने और पदोन्नति न होने के कारण बड़ी संख्या में प्रधानाचार्य के पद खाली थे। इसलिए इस समस्या को दूर करने के लिए ही सीधी भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है।
योग्यता और अनुभव के आधार पर सीधी भर्ती के साथ-साथ पदोन्नति के माध्यम से भी पद भरे जा रहे हैं, जिसमें वरिष्ठता और योग्यता दोनों शामिल हैं।
बहरहाल मामला हाई कोर्ट में है और सुनवाई के बाद ही शिक्षक संघ और सरकार के बीच समाधान निकलने की उम्मीद है।
आपको बता दें कि राजकीय माध्यमिक शिक्षक 2023 से ही इस भर्ती के खिलाफ आंदोलन कर रहा है और अपनी मांगें पूरी न होने तक आंदोलन जारी रखने पर अड़ा है। शिक्षकों का कहना है कि ऐसा करके सरकार उनका पदोन्नति का अधिकार छीन रही है जो कि उनके साथ अन्याय है। सरकार स्कूलों में प्रधानाचार्यों के रिक्त पदों को भरने के लिए 50% पदों पर पदोन्नति और 50% पदों पर सीधी भर्ती का प्रस्ताव लाई है, जिसका शिक्षक विरोध कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि प्रधानाचार्य का पद हमेशा से पदोन्नति के माध्यम से भरा जाता रहा है और अब सीधी भर्ती से उनका यह अधिकार छीन रहा है। शिक्षक संघों का आरोप है कि सरकार केवल राजनीतिक लाभ के लिए नियमों में बदलाव कर रही है।
वरिष्ठ शिक्षकों के साथ ही कई अन्य शिक्षकों ने वर्षों से पदोन्नति की उम्मीद में सेवाएं दी हैं और अब उन्हें नजरअंदाज करके नए लोगों की भर्ती करना अन्यायपूर्ण है। बहरहाल इस समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो स्थिति विस्फोटक हो सकती है।





