पुलिस ने बरसाईं लाठियां
गुजरात। सूरत के उधना स्टेशन पर LPG संकट और छुट्टियों के कारण भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिसके बाद भगदड़ जैसे हालात पैदा हो गए। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
मिडिल-ईस्ट जंग और एलपीजी संकट का असर भारत के अलग-अलग इलाकों में देखने को मिल रहा है। कंपनियों की बिल्डिंग पर ताले लगने शुरू हो गए हैं और दूर-दराज के मजदूरों को पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सूरत में उधना रेलवे स्टेशन पर रविवार को यात्रियों का रेला उमड़ पड़ा। यूपी-बिहार जाने वाली ट्रेनों में सीट हासिल करने के लिए हजारों लोग स्टेशन पहुंचे। इस दौरान लाठीचार्ज के बाद भगदड़ जैसे हालात देखने को मिले। सुबह करीब 11:30 बजे जब उधना-हसनपुर ट्रेन के लिए यात्रियों को कतारों में खड़ा किया जा रहा था, तभी कुछ लोगों ने लाइन तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस और आरपीएफ के जवानों को भीड़ को कंट्रोल करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में यात्री पुलिस की डंडेबाजी से बचने के लिए लोहे की जालियों के ऊपर से कूदते दिखाई दे रहे हैं। रेलवे के एक अधिकारी के मुताबिक, दोपहर तक 6 ट्रेनों के जरिए 21,000 से ज्यादा यात्री रवाना किए जा चुके थे, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो गया। यात्रियों से बार-बार कतार में चलने की अपील की गई, लेकिन अव्यवस्था के कारण पुलिस को सख्त कदम उठाने पड़े।
स्टेशन पर उमड़ी इस भारी भीड़ के पीछे समर वेकेशन भी एक वजह है लेकिन पिछले एक-दो महीने से एलपीजी क्राइसिस के चलते कामगारों का पलायन जारी है। समर सीजन की छुट्टियों और एलपीजी संकट के चलते यात्रियों की संख्या दोगुनी हो गई है, जिससे रेलवे की तमाम व्यवस्थाएं बौनी साबित हो रही हैं। रेलवे अधिकारीयों का कहना है कि “समर सीजन चल रहा है और यात्रियों के लिए हमने स्पेशल ट्रेनें भी चलाई हैं।
लेकिन हकीकत यह है कि गैस किल्लत से सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा है। करीब 30% यानी 3 लाख मजदूर पलायन कर चुके हैं, जिससे उत्पादन घटकर 6.5 करोड़ मीटर से 4.5 करोड़ मीटर रोजाना रह गया। इंडस्ट्री को 15,000 गैस सिलेंडर की जरूरत है, लेकिन सप्लाई धीमी है। हालात नहीं सुधरे तो और मजदूरों के जाने से नुकसान बढ़ने का खतरा बना हुआ है।





